एक बहन मातेश्वरी से मिलने आती है और वह वापस जाते समय कहती है की बहन मैं आपसे मिलने आई थी तब मैंने चूल्हे पर दाल छोड़ आई और अंगारे पर भात सीख रहा है एवं मेरी सासु मेरी राह देख रही है मेरी ननंद मेरी चुगली करेगी देर हो गई तो मेरी सास मेरा गाल मरोड़े गी मेरा देवर भी कोई सीधा नहीं है ऐसी मन की बात मातेश्वरी से कहते हुए कहती है हे मातेश्वरी अब मुझे घर जाना होगा इस पर यह पूरा भजन बना हुआ है