चाचा ताला सैयद की रहस्यमई मज़ार जब नाप लेते हैं तो क्यों आता हैं अंतर
महोबा के सेनापति चाचा ताला सैयद की रहस्यमई मज़ार जो उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में कीरत सागर के तट पर धुनिया पहाड़ी पर स्थित है और जैसे ही इस मजार का नाप लेते हैं तो काम या बाढ़ हो जाता है और अंतर आता है चाचा ताला सैयद की कहानी बहुत ही दिलचस्प है इनका जन्म गोरखपुर के तालग्राम में हुआ था और फिर यह बनारस के राजा के यहां नौकरी करने लगे फिर इसके बाद महोब आए जो यहां के राजा परमार थे और राज्य में काम करने लगे और आल्हा ऊदल यानी चाचा कहकर पुकारते थे और उन्होंने ही युद्ध की कला सखाई दो वीर योद्धाओं को और पृथ्वीराज चौहान को भी हराया इन्होंने साथ में मिलकर बहुत सारे युद्ध लड़े मगर बैरागढ़ की लड़ाई में आने धोखे से मार दिया गया और उनके साथ और भी सेनापति थे फिर वहां से लाकर इस महोबा में दफनाया क्योंकि उन्होंने रानी मल्हना से वचन लिया था यहां कुछ ऐसे चमत्कार भी होते रहते हैं चाचा ताला सैयद का इतिहास महोबा से सबसे ज्यादा जुड़ा हुआ है जो बुंदेलखंड क्षेत्र में आता था उसे समय भी उन्होंने अनेक युद्ध लड़े और महोबा के लिए जान निछावर किया करते थे