गंगा अवतरण: जब महादेव ने थामा गंगा का प्रचंड वेग ! Premanand ji maharaj
गंगा अवतरण की दिव्य कथा: एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा
भगवान शिव की जटाओं से प्रवाहित होने वाली, तीनों लोकों को पावन करने वाली, माता गंगा का अवतरण एक अत्यंत रोचक और दिव्य कथा है। यह कथा हमें भक्ति, तपस्या, समर्पण और धैर्य की सीख देती है।
जब भगीरथ जी ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए घोर तपस्या की, तब माता गंगा प्रसन्न हुईं, लेकिन उन्होंने दो शंकाएँ प्रकट कीं—उनके वेग को रोकने वाला कौन होगा, और पापियों के स्पर्श से वे अपवित्र होने से कैसे बचेंगी? भगीरथ जी ने भगवान शिव की आराधना की, और महादेव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण कर लिया। अंततः जब उन्होंने अपनी जटा को खोला, तो गंगा तीन स्वरूपों में प्रवाहित हुई—अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी।
गंगा के स्पर्श मात्र से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ, और तभी से गंगा को "त्रिभुवन पावनी" कहा जाता है। गंगा जल का पान, स्नान, और दर्शन मात्र से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीव को दिव्यता प्राप्त होती है।
यह कथा केवल पौराणिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है। यह हमें यह समझाती है कि सच्चे प्रयास, भक्ति, और त्याग से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। तो आइए, इस दिव्य कथा को सुनें और मां गंगा की महिमा का आनंद लें!
🚩 गंगा महिमा अमर रहे! हर हर गंगे! 🚩
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