घर पर चल या अचल प्राणप्रतिष्ठा। नित्य पूजा मूर्ति स्थापन की जरुरी बातें | Grihastha pranpratishtha
~~~~~~~~~~~~~~धूप धुनुची आरती~~~~~~~~~~~~~~~~
" ॐ वनस्पति रसो दिव्यो गन्धाढ्यः सुमनोहरः |
मया निवेदिता भक्त्या धूपोहयं प्रतिगृह्यताम|| "
" ॐ वनस्पति रसो दिव्यो गन्धर्वा सुरभोजनः|
मया निवेदिता भक्त्या धूपोहयं प्रतिगृह्यताम|| "
दिव्य वनस्पति रस से समृद्ध यह सुगन्धित धूप जो सर्वदेव के आघ्राण के लिए उत्तम है। में भक्ति भाव से वही धूप आपको प्रदान करता हु कृपया इसे स्वीकार करें।
धुनुची धूप : धूप प्रज्वलन के पीतल पात्र को धुनुची या धूपचि कहा जाता है। इसे आजकल धूपदान या धूपदानी भी कहते हैं। गोबर के कंडे या नारियल के छिलके से इसे राल गुग्गुल घी या अष्टांग धूप से जलाया जाता है। धुनुची धूप को हवन धूप और यज्ञ धूप भी कहा जाता है। इसलिए इसे धूपाग्नि भी कहा जाता है।
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