#सनातन_हिन्दू संस्कृति में जितना जीवन का महत्व है उससे कहीं अधिक स्वर्गवास उपरान्त मोक्ष का भी है, प्राचीन काल में महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए #भगवान_शिव की कठोर तपस्या से प्रसन्न कर अपनी इच्छा व्यक्त की।
तब #भगवान_शिव ने ब्रह्मा जी के कमंडल से निकली गंगा को अपनी जटाओं में रोक लिया और फिर उनको पृथ्वी पर छोड़ा। इस प्रकार गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ और महाराजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष की प्राप्ति हुई। #भगीरथ_की_तपस्या से अवतरित होने के कारण गंगा को #'भागीरथी' भी कहा जाता है।
आज भी सनातनी हिन्दू अपने पूर्वजों की अस्थियों को गंगाजी में प्रवाहित कर उनके मोक्ष और कल्याण की कामना करते हैं।
गंगा स्नान और तीर्थ का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि सारे तीर्थ बार -बार और #गंगा_स्नान एक बार।
आप भी #मोक्षदायिनी #माँ_गंगा की कथा सुनें और जीवन धन्य करें।
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