अध्यात्म कहता है कि सारा ब्रह्मांड ऊर्जा का विस्तार है।
E=mc² इस विचार की पुष्टि करता है कि हर कण (atom) में अनंत ऊर्जा है।
योग और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति इस ऊर्जा को अपने भीतर अनुभव कर सकता है।
2. अद्वैत वेदांत का दृष्टिकोण:
अद्वैत वेदांत में कहा गया है कि "ब्रह्म" (परम सत्य) ही सब कुछ है, और सब कुछ उसी से उत्पन्न हुआ है।
यह E=mc² के समान है, जहाँ द्रव्यमान और ऊर्जा एक ही सत्य के दो रूप हैं।
3. आत्मा और शरीर का संबंध:
जिस प्रकार द्रव्यमान ऊर्जा का रूपांतरण है, उसी प्रकार शरीर और आत्मा भी एक ही चेतना के दो अलग-अलग रूप हैं।
अध्यात्म सिखाता है कि आत्मा अमर है और शरीर केवल उसका भौतिक रूप है।
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