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हिमांचल राजा | शिव विवाह तमूरा भजन | पं. नर्मदा तिवारी और बलराम पटेल का अलौकिक गायन | बुंदेली भजन

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*** WELCOME *** channal - bundeli baba kapil shrivastava यह भजन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की दिव्य और पवित्र कथा को प्रस्तुत करता है। इसका आधार पौराणिक ग्रंथ और हिंदू धर्म की लोक कथाएँ हैं। यह भजन शिव-पार्वती के अद्भुत मिलन, उनके विवाह के समय की घटनाओं और हिमाचल राजा के भावनात्मक मनोदशा को चित्रित करता है। भजन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व: शिव-पार्वती विवाह की महिमा: भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हिंदू धर्म में शक्ति और शिव के एकीकरण का प्रतीक है। यह भजन उस दिव्य घटना का वर्णन करता है, जिसमें हिमालय और देवताओं ने उत्सव मनाया। भक्ति का संचार: यह भजन श्रोताओं के मन में भक्ति की भावना को जागृत करता है। भगवान शिव को 'भोलेनाथ' और माता पार्वती को 'जगजननी' मानकर गाया गया यह भजन श्रद्धा और प्रेम का संदेश देता है। लोक संस्कृति का प्रतीक: "तमूरा भजन" और बुंदेली शैली में गाए गए ऐसे भजन क्षेत्रीय लोक-संस्कृति को संरक्षित करते हैं। यह भजन बुंदेली परंपराओं और लोकगीतों का अद्भुत उदाहरण है। प्रेरणा का स्रोत: यह भजन बताता है कि कठिनाइयों और विरोधों के बावजूद, जब प्रेम और भक्ति प्रबल होती है, तो हर बाधा को पार किया जा सकता है। माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव का त्याग इस भजन में झलकता है। आध्यात्मिक संदेश: इस भजन में छिपा संदेश है कि जीवन में दिव्यता और साधना का महत्व है। भगवान शिव का विवाह यह दर्शाता है कि संसार और अध्यात्म का समन्वय जरूरी है। परिवारिक मूल्यों का चित्रण: हिमांचल राजा और माता मैना के संवाद, विवाह की तैयारियाँ, और शिव-पार्वती के प्रति उनका प्रेम पारिवारिक संबंधों और आदर्शों को उजागर करता है। निष्कर्ष: "हिमांचल राजा चल देखो कैलाश" न केवल एक भजन है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, धर्म और भक्ति की भावना का जीवंत चित्रण है। इसे सुनने और गाने से मन शांत होता है और भगवान शिव तथा माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कलाकारों की जानकारी: 1. पंडित नर्मदा तिवारी परिचय: पंडित नर्मदा तिवारी ग्राम इमलिया घोना के प्रसिद्ध लोक गायक और भजन कलाकार हैं। उनकी गायकी में बुंदेली लोकगीतों और भजनों की गहरी समझ झलकती है। वे अपनी मधुर आवाज और भक्ति भावना के लिए जाने जाते हैं। विशेषता: बुंदेली भजनों और तमूरा संगीत में विशेष दक्षता। शिव-पार्वती और अन्य धार्मिक कथाओं पर आधारित भजनों को भावनात्मक गहराई से प्रस्तुत करने की कला। योगदान: बुंदेली संगीत को संजोने और जन-जन तक पहुँचाने में उनका योगदान अद्वितीय है। 2. बलराम पटेल परिचय: बलराम पटेल ग्राम रेंगुआ के है और बुंदेली संगीत परंपरा के एक और प्रमुख गायक हैं। उनकी आवाज में लोक संगीत की मिठास और भजनों का आध्यात्मिक आकर्षण है। विशेषता: बुंदेली भाषा में गाए जाने वाले तमूरा भजनों के लिए विशेष पहचान। उनकी गायकी में साधना और भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। योगदान: बलराम पटेल ने पारंपरिक बुंदेली भजनों को आधुनिक दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया है। पंडित नर्मदा तिवारी और बलराम पटेल की जोड़ी ने बुंदेली तमूरा भजनों को नई ऊँचाई दी है। इनकी गायकी में शिव-पार्वती जैसे धार्मिक प्रसंगों की अद्भुत प्रस्तुति होती है, जो श्रोताओं को भक्ति में डूबने पर मजबूर कर देती है। दोनों कलाकार अपनी साधारण और सशक्त शैली से बुंदेली संगीत को लोकप्रिय बनाने में सफल रहे हैं। नोट: इनकी कला न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि पूरे हिंदू भक्ति संगीत में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। #ShivVivahBhajan #BundeliBhajan #HimachalRaja #TamuraBhajan भजन "हिमांचल राजा चल देखो कैलाश" में दर्शाए गए भाव और संदेश: यह भजन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की कथा को संगीतमय रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के साथ-साथ जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश छिपे हुए हैं। 1. भक्ति और श्रद्धा का भाव यह भजन भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति असीम भक्ति और श्रद्धा को दर्शाता है। श्रोता भजन सुनते हुए उनके दिव्य प्रेम और अद्भुत शक्ति को महसूस करते हैं। 2. आध्यात्मिक प्रेम का संदेश शिव और पार्वती का विवाह केवल सांसारिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि सच्चा प्रेम त्याग, तपस्या और समर्पण से प्राप्त होता है। 3. परिवार और समाज का महत्व हिमालय और माता मैना द्वारा बेटी (पार्वती) के विवाह की तैयारियाँ यह दर्शाती हैं कि पारिवारिक मूल्यों और समाज के रीति-रिवाजों का पालन कितना आवश्यक है। विवाह समारोह के माध्यम से रिश्तों की पवित्रता और उत्सवों की सामूहिकता झलकती है। 4. त्याग और तपस्या का महत्व माता पार्वती का वर्षों तक भगवान शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या करना इस बात को दर्शाता है कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए धैर्य और त्याग की आवश्यकता होती है। यह भजन साधना और दृढ़ संकल्प का महत्व सिखाता है। 5. सादगी और संतोष का संदेश भगवान शिव का जीवन सादगी और संतोष का प्रतीक है। भजन यह बताता है कि आडंबर और भौतिकता के बजाय सादगी और अध्यात्म में सच्चा सुख है। 6. देवताओं का उल्लास और दिव्यता शिव-पार्वती के विवाह में देवताओं का उत्सव मनाना यह दर्शाता है कि यह घटना केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय स्तर पर महत्वपूर्ण है। यह भजन दर्शकों को दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। 7. लोक-संस्कृति का संरक्षण बुंदेली शैली में गाए गए इस भजन के माध्यम से क्षेत्रीय संगीत और परंपराओं को संरक्षित करने का संदेश मिलता है। यह बताता है कि हमारी जड़ें और परंपराएँ हमारी पहचान हैं। *** thanks for watching *** Thank you for visiting our channel we want you to visit again

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