दुःख के कारण क्या है ? जन्म-मृत्यु जरा-व्याधि-दुःख-दोषानुदर्शनम् II शरीर जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और बीमारी के अपने सिद्धांतों के अधीन है,
लेकिन जो आध्यात्मिक जीवन में स्थित है
(यतो भक्तिर अधोक्षज) उसका न तो जन्म होता है,
न मृत्यु, न बुढ़ापा और न ही कोई बीमारी ,
आत्म-अज्ञान