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राक्षस चार्वाक ने युद्धिष्ठिर को किया निरुत्तर - महाभारत में चार्वाक दर्शन Charvak Philosophy Story

Kahaniyon ki Chaupal 37,240 lượt xem 1 month ago
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चार्वाक एक नास्तिक दर्शन है जिसका मूल ग्रन्थ आज अप्राप्त है, परन्तु लगभग सभी प्राचीन ब्राह्मण, बौद्ध या जैन ग्रंथों में चार्वाकों का उल्लेख मिलता है। चार्वाक बौद्ध और जैन की ही तरह वेद से असहमति रखने वाला नास्तिक दर्शन है, पर इसकी नास्तिकता बौद्ध और जैन दर्शन से अधिक भौतिक है। चरम सुखवाद के प्रस्तावक हैं चार्वाक। रोचक तथ्य यह है कि तमाम असहमतियों और अनिश्चितताओं के बावजूद यह मत बहुमत से मान्य है कि चार्वाक दर्शन का प्रतिपादन देव गुरु बृहस्पति ने किया। बृहस्पति, देव गुरु और दर्शन वेद विरुद्ध, भला क्यों ? पुराण इसका उत्तर देते हैं, जो कथा में वर्णित है। युद्धिष्ठिर के राज्याभिषेक के समय दुर्योधन का मित्र एक चार्वाक ब्राह्मण वेश में आकर युद्धिष्ठिर को अपने वचनों से विद्ध कर देता है और फिर जो होता है वह कथा का आकर्षण है। प्रस्तुत कहानी पितामह भीष्म के चरित्र निर्माण में किन गुरुओं का योगदान था उसपर भी चर्चा करती है; तो इस ज्ञानवर्धक कहानी को अंत तक अवश्य सुनिए।

Charvak Philosophy in Pauranik context
Kahaniyon Ki Chaupal

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