जब श्री रजनीश मिले पूर्वजन्म की माँ से।ओशो ने माँ आनंदमयी के चरण छुए। माँ बेटे की दिव्य प्रेम गाथा.
@ गुरु स्टोरीज़
माता मदन का जन्म ५ नवंबर १९१९ को हुआ। बचपन से ही बालिका मदन सबकी चेहेती थी और संस्कृत और नृत्य में पारंगत थी. बड़े होने पर मदन का विवाह श्री रेखचंद पारख के साथ कर दिया गया। माता ने ३ बालिकाओं को जान दिया परन्तु उनका मन हमेशा एक बालक को ढूंढ़ता रहा। इसी बीच उन्होने एक अनाथाश्रम भी खोला। उन्होने अपना समय कविताओं और समाज सेवा में लगाया. १९६० मैं वर्धा महाराष्ट्र में जैन समुदाय ने एक सभा का आयोजन किया जिसमे आचार्य रजनीश को विशेष आमंत्रण मिला। वहां माता मदन ने जैसे ही पहेली बार ओशो को देखा की उनका मन उनके आभामंडल और तेज से मंत्र मुग्ध हो गया।ओशो के आग्रह पर माता ने कवितायेँ भी सुनायी. आगे ऐसा क्या हुआ की माता श्री रजनीश की माँ बन गयी और कैसे किया श्री रजनीश ने माँ मदन का सम्मान, जानिए इस एपिसोड में.
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