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हमारा सुख, चैन कैसे लुट गया ? वापस कैसे आएगा ? कहाँ कमी रह गई ? #रितेश्वर जी | @आध्यात्मिकरस-सारतत्व

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जिसको देखो जो मिला उसमें संतुष्ट नहीं | कामनाओ का इच्छाओं का सर्प सभी को डस चूका है | जिंदगी मजबूरी में है और बची खुची मजदूरी में है, यह दुर्लभ शरीर मजबूरी और मजदूरी में ना कट जाए | इसके लिए जीवन नहीं मिला था | हम आनंद के अंश हैं | उपनिषद कहते हैं आनंद ही ब्रह्म है जिस ब्रह्म की खोज में हम तुम लगे हैं वह आनंद ही तो है | आनंद चाहिए तो सबको पर मिलता किसी को नहीं | कोन लूट कर ले गया हमारे आनंद को.... कैसे पुनः मिलेगा ? @आध्यात्मिकरस-सारतत्व गुरुदेव भगवान के सनातन विश्वविद्यालय के संकल्प से जुडिए | राष्ट्र हित में अपना योगदान दीजिए | निचे दी गई लिंक से जुडिए | https://sanatanuniversity.in/

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