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वीडियो जानकारी: 13.09.23, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा
Title : (गीता-23) गीता की वो एक बात, जिसके बाद कुछ बचता नहीं || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)
0:00 - Intro
0:58 - सरल को जटिल बनाने की हमारी आदत
11:10 - सरल और सुगम अध्यात्म के लाभ
14:46 - मुक्ति का सूत्र; गीता, अध्याय 3, श्लोक 27 और 28
27:18 - प्रकृति के गुण और संयोगों का संबंध
29:41 - बाप और नालायक बेटे की रोचक कहानी से सीख
34:45 - सबसे बड़ा दर्द
40:32 - “मैं” का अंत
47:38 - जीवन का आनंद सरलता में है
56:46 - हमें अकेलापन क्यों सताता है?
1:04:16 - जंगल के जीवन और मनुष्य में संबंध
1:18:28 - खूबसूरती के पीछे प्रकृति का मकसद
1:30:52 - समापन
विवरण:
इस वीडियो में आचार्य जी ने एक कहानी के माध्यम से जीवन के जटिलताओं और आत्मज्ञान की सरलता को समझाने का प्रयास किया है। कहानी में एक बाप और उसका नालायक बेटा है, जो बाप के पैसे को लूटता है और बाप को दुखी करता है। बाप अपने बेटे को एक तिजोरी के बारे में बताता है, जिसमें बहुत सारा धन है, लेकिन उसे छूने पर सब कुछ राख में बदल जाएगा। यह कहानी जीवन में उन चीजों की रक्षा करने के तनाव को दर्शाती है, जो वास्तव में हमारे पास हैं ही नहीं।
आचार्य जी ने बताया कि हम अपने अहंकार और 'मैं' की भावना में फंसे रहते हैं, जो हमें दुख और तनाव में डालती है। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मज्ञान का अर्थ है यह जान लेना कि 'मैं' वास्तव में नहीं हूं। जब हम इस सत्य को समझ लेते हैं, तो हम मुक्त हो जाते हैं।
आचार्य जी ने यह भी बताया कि प्रकृति के गुण और कर्म हमारे जीवन को संचालित करते हैं, और हमें यह समझना चाहिए कि हम केवल प्रकृति का हिस्सा हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जो कुछ भी हमारे जीवन में हो रहा है, वह प्रकृति का खेल है, और हमें इसे समझकर अपने आप को मुक्त करना चाहिए।
प्रसंग:
~ अध्यात्म को जटिल क्यों बना दिया?
~ अध्यात्म में पाखंड, अंधविश्वास, मान्यताएँ कैसे आ गई?
~ कहाँ लुटने की संभावना कम हो जाती है?
~ आत्मज्ञान किसके समान होता है?
~ चीज़ों को जानना, समझना क्यों ज़रूरी है?
~ कोई सीधी, सरल बात को घुमाता क्यों है?
~ आनंद कहाँ है?
~ तत्वज्ञ कौन है?
~ सरलता क्या मांगती है?
संगीत: मिलिंद दाते
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