हरियागढ़ का ऐतिहासिक किला
इतिहास के पन्नों की इबारत को जानिए
बावन गढ़ों किलों की विरासत को जानिए
बिखरी हैं हर जुबान पे जिसकी कहानियाँ
उस राजा जाटबा की हक़ीक़त को जानिए
डॉ सूरज धुर्वे
हरियागढ़ रियासत मध्य गोंडवाना की एक महत्त्वपूर्ण विरासत थी जो अपने वैभवशाली इतिहास के लिए आज भी जानी जाती है। यह रियासत गोंड़ वंश के धुरवा गोत्र का महत्त्वपूर्ण गढ़ थी जो कभी गढ़ा सरकार के आधीन हुआ करती थी और इसी रियासत के एक महान और प्रतापी राजा हुए थे जिनके नाम हरया सिंह धुरवा था। उसी महान कोइतूर सम्राट के वंशज राजा जाटबा थे। राजा जाटबा के पिता का नाम सुक्कुम सिंह धुर्वा था तथा माता का नाम रानी कंको बाई था। राजा जाटबा का विवाह देवगढ़ के विस्थापित उइके राजवंश की एक खूबसूरत राजकुमारी पंडरी कुँवर से हुआ था जिनसे तीन सन्तानें दलशाह, दुर्ग शाह और कोकशाह हुए।
हरिया गढ़ किले के कुछ मुख्य आकर्षण जैसे रेवा नदी उद्गम, कली कंकाली दाई का ठाना, चंडीदाई का ठाना, हरियागढ़ किले के भग्नावशेष और प्राचीन खंडहर, खप्पर दाई का ठाना, देवगढ़ किले की सुरंग, प्राकृतिक गुफा में फड़ापेन ठाना और राजा जाटबा और उनके परिवार के पेन ठाना आपको बरबस इस किले की तरफ खींच लाते हैं। चूँकि यह क़िला लकड़ी से बना हुआ था और भोंसले और पेशवाओं के आक्रमण के बाद इसे जला दिया गया था इसलिए इसके खंडहर या अवशेष हरियागढ़ की पहाड़ी पर दिखाई नहीं देते हैं।
हरियागढ़ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 225 किंलोमीटर दक्षिणपूर्व में छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव तहसील में स्थित है।हरियागढ़ किला हरियागढ़ गाँव (अब इसे हिरदागढ़ के नाम से जाना जाता है) के दक्षिण पूर्व में स्थित है जो छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। इस रियासत का प्राचीन और सही नामहररिया गढ़ था जिसे हरया गढ़ भी कहा जाता था जो वहाँ के प्रतापी राजा हरया सिंह धुर्वे के द्वारा बसाया गया था। छिंदवाड़ा नागपुररेलवे लाइन पर स्थित हिरदागढ़ रेल्वे स्टेशन का नाम इसी रियासत के नाम पर रखा गया था जिसे अब हरियागढ़ न कहकर हिरदागढ़ कहा जाता है। इस रियासत की प्राचीन गौरव और ऐतिहासिक महत्त्व को खत्म करने के लिए ही इसका नाम बदल हिरदा गढ़ कर दिया गया जिसे अब गूगल के नक्शे में हीरा गढ़ के