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Implement Changes | परंपराएँ विज्ञान या अन्धविश्वास | Harshvardhan Jain | 7690030010

Harshvarrdhan Jain 624,522 1 year ago
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#mplement_Changes #परंपराएँ_विज्ञान_या_अन्धविश्वास #harshvardhanjain Spirituality is a medium to awaken the cultured nature of the society, to make it powerful and to develop a rational mindset.  When spirituality rises, a civilization dawns, a civilized society emerges and the best human values are established. अज्ञानता के प्रश्न रूपी नेत्रों के सहारे ज्ञान रूपी ब्रह्मांड के दर्शन होते हैं। इसलिए अपने प्रश्नों की अग्नि को बुझने मत दो। प्रश्नों की अग्नि को इतना प्रज्वलित करो, कि ज्ञान का ज्वालामुखी धधक उठे। यही ज्वालामुखी ज्ञान के नए अवतार रूपी अध्यात्म का बीज बोता है क्योंकि बीज को अंकुरित होकर पेड़ बनने के लिए अपना अस्तित्व मिटाना पड़ता है अर्थात परिवर्तन से गुजरना पड़ता है। यही परिवर्तन नए सिद्धांतों को जन्म देता है। जिस प्रकार व्यक्ति के जन्म से लेकर मरण तक सब कुछ पूर्व निर्धारित है। उसी प्रकार अज्ञान से ज्ञान के उदय तक, सब कुछ एक सुनियोजित प्रक्रिया का परिणाम है; सब कुछ सैद्धांतिक है, सब कुछ स्पष्ट है। फिर भी अधिकतर लोग अपने अस्तित्व से ही अनभिज्ञ रहते हैं और वे परिवर्तन के अस्तित्व को ही नकार देते हैं। लेकिन सफलता के शिखर पर उड़ान भरने वाले सफलता के पुजारी परिवर्तन को सफलता का माध्यम मानकर संघर्ष को अपना मित्र बना लेते हैं और कमजोरी को अपना शस्त्र बना लेते हैं जिससे एक नए सफलता के शास्त्र सम्मत ग्रंथ की रचना करके लोगों के लिए एक मार्गदर्शक संहिता का निर्माण कर देते हैं। इस परिवर्तनशील संसार में परिवर्तन ही एक मात्र सत्य है। अपने मनोवांछित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लक्ष्य के अनुकूल परिवर्तन को स्वीकार करना ही पड़ता है। तभी महत्वाकांक्षी परिवर्तन परिणाम स्वरुप प्रकट होते हैं। यही जीवन का सबसे बड़ा सिद्धांत है कि परिवर्तन ही प्रकृति को चलाता है। परिवर्तन ही प्राणी मात्र का मूल है। इसलिए अपने अदृश्य भविष्य को जीतने के लिए परिवर्तन के मूल स्वरूप को समझने की आवश्यकता होती है। जन्म से लेकर मरण तक व्यक्ति अनेकानेक अनुभवों के दौर से गुजरता है, सीखता है और सिखाता है। यही परम्परागत जीवन शैली जीवन चक्र कहलाती है। इसी परंपरागत ज्ञान का अनुसंधान करके ज्ञान रूपी अध्याय से अध्यात्म का प्रारंभ होता है। जिनके अलग-अलग पहलुओं को समझने के लिए एकाग्रचित्त अवस्था का होना आवश्यक होता है। अपने मायाजाल में उलझा मानव परम ज्ञान को समझने में असमर्थ रहता है क्योंकि परम ज्ञान के लिए परम त्याग करने पड़ते हैं। परम त्याग के बिना परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती है। परमात्मा एक आत्मा की एक उच्चतम जागृत अवस्था है। परमात्मा एक अवस्था का नाम है, जिसके पश्चात जीवन में कुछ भी प्राप्त करने के लिए शेष ही नहीं रहता है। अपने निजी स्वार्थ, मान, अपमान, दुख, सुख; सांसारिक मोह और बंधनों के लिए कोई स्थान नहीं रहता है क्योंकि परम ज्ञान भौतिक महत्वाकांक्षाओं की सीमाओं को तोड़कर अलौकिक ब्रह्मांड में विचरण करता है। अध्यात्म एक माध्यम है समाज के संस्कारी स्वभाव को जागृत करने के लिए, सामर्थ्यवान बनाने के लिए और तर्कशील मानसिकता विकसित करने के लिए। जब आध्यात्मिकता का उदय होता है, तब एक सभ्यता का सूर्योदय होता है, सभ्य समाज का प्रादुर्भाव होता है और मानव के सर्वश्रेष्ठ जीवनमूल्यों की स्थापना होती है। उदाहरण के लिए प्राचीन भारत सर्वश्रेष्ठ सभ्यता का जीता जागता प्रमाण है। भारतीय दर्शन ने अद्भुत ब्रह्मांड के अकल्पनीय स्वरूप को वैश्विक धरातल पर प्रस्तुत किया है। भारत के महान विद्वानों और महान कलाकारों ने अपने ज्ञान और कलाओं का प्रचार प्रसार पूरी दुनिया में करने का प्रयास किया। जिसके परिणाम स्वरूप भारत के ज्ञान और विज्ञान की अमिट छाप पूरी दुनिया में पाई जाती है। इसलिए अपने सामर्थ्य के अद्भुत स्वरूप को प्रस्तुत करने का संकल्प करें। आपका सामर्थ्य निराकार है, जिसको साकार करना आपका ही कर्तव्य है। FOR TRAINING CONTACT US: 📧 Email: [email protected] 📱 Mobile: 📞 1️⃣ +91-7690030010 📞 2️⃣ +91-8306653253 📞 3️⃣ +91-8824183845 FOLLOW US: 🐦 Twitter: https://bit.ly/495B7dZ 📷 Instagram: https://bit.ly/471K3PW 📘 Facebook: https://bit.ly/3QaTRzY 📢 Telegram: https://bit.ly/3tEojeh JOIN OUR MEMBERSHIP: 💻 Click this link to join: https://bit.ly/3M8HkMA VISIT OUR WEBSITE: 🌐 www.harshvardhanjain.in ! आव्हान ! प्यासे का नदी से मिलना तय है | 🎥 https://bit.ly/3s5zFYA

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