Katha 19
Naam Japne Me Mann Kyu Nahi Lagta
जब किसी से कहो न की नाम जपो ,
तो इक आम सा जवाब मिलता है
लगभग सभी से , के नाम जपने में मन नहीं लगता
नाम जपने में मन क्यों नही लगता है इसके पीछे एक बड़ी सी छोटी सी वजह है , इसको समझने के लिए हम को यह समझना पड़ेगा कि हमारा मन किन कामों में लगता है
अगर हमें कोई कहे कि तीन बजे पांच लाख ले लेना आकर
तो गारंटी है इस बात की _ कि जिसे मिलने वाले हो
अगर हम हो तो रात को सोएंगे ही नहीं कि एक बार लेकर सो जाए
कही रात को नींद ना खुले तो
क्या मतलब निकलता है इसका इस मन को जिस चीज में लाभ दिखाई देता है यह मन वह करता है । आज तक हमारा नाम जख्मी में नहीं लगा उसके पीछे बजाए एक ही है
अभी तक के नाम की वैल्यू का पता नहीं चला
इस मन को जिस वक्त समझ में आ गया ना कि नाम की वैल्यू क्या है _
महापुरुष वचन किया करते हैं
जो नहीं जपेंगे नाम वह तो पछताएंगे ही और जो जपेंगे वह भी पछताएंगे
सवाल किया भाई जो नहीं जपेंगे वह तो पछताएंगे समझ में आती है बात क्योंकि नरको में जाना पड़ेगा 8400000 योनि भुगतनी पड़ेगी
और जो जपेंगे वह क्यों पछताएंगे कहने लगे वह इसलिए पछताएंगे जब पता चलेगा की जपे हुए नाम की कीमत इतनी ज्यादा है तो हमने ज्यादा क्यों नहीं जपा
इस मन को समझ में आ जाए कि इस नाम की कीमत क्या है
यह सत्संग करने का भाव क्या है
हम जो सत्संग में आते हैं इस मन को नाम की कीमत का पता चल जाए और नाम की कीमत क्या है नाम जपने से होता क्या है
जितने भी वेद शास्त्र , सिमरथियां , पुराण , पोथियां
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का एक एक अक्षर
एक एक बाणी एक एक शब्द , बार-बार एक ही पुकार करता है की नाम जपो
सिमरथ बेद पुरान पुकार पोथियां , नाम बिना सब कूद
दुकान पर जाने का मन नहीं करता पर मन कहता है जा नहीं तो नुकसान हो जाएगा बीमार होता है तो भी जाकर दुकान खोल कर बैठ जाता है क्यों वहां पर लाभ दिखाई देता है
जिस दिन नाम की महिमा का पता चल गया बीमार होंगे ना
तब भी नाम जपने बैठ जाओगे
आओ कोशिश करें आज ये समझे
नाम करता क्या है नाम की ताकत क्या है आज का प्रकरण
इस बात को समझने की कोशिश करते हैं
आओ आज समझते हैं नाम की कीमत को
जो प्रभु का नाम जपते हैं नाम करता क्या है
जो प्रभु का नाम जपते रहता है
नाम जपते जपते उसका मन अगर प्रभु चरणों में जुड़ जाता है
उसका जपा हुआ नाम उसे भा जाए
तो क्या होता है – वह उसको प्यारा लगने लगता है और जो उसको प्यारा लगने लगता है तो क्या होता है जो हरि का प्यारा तो सब ना का प्यारा
उसका जपा हुआ नाम अगर परमेश्वर को भा जाए
तो वह इंसान परमेश्वर को भा जाता है
जो इंसान परमेश्वर को भा जाए वह इंसान सबको प्यारा लगने लगता है
जो हरि का प्यारा तो सब ना का प्यारा
लाखों-करोड़ों आए और चले गए
महापुरुष फरमाते हैं और जिन्होंने उसका नाम जपा..
कबीर जी के समय राजा कौन था कोई नहीं जानता लेकिन कबीर जी को सब जानते हैं
जानते ही नहीं मानते भी है
सर झुकाते हैं जब माथा टेकते हैं गुरु ग्रंथ साहब जी को भी कबीर जी बैठे हुए हैं अंदर
नामदेव जी के समय राजा कौन था धनवान सेठ कौन था कोई नहीं जानता
पर नामदेव जी को सब जानते हैं
बड़े ध्यान से सुनना इस सच्ची घटना को ताकि हमारा मन नाम की ताकत को समझे
एक आदमी ब्राह्मण पंडित , उस गांव में जितने भी ब्राह्मण थे पंडित थे सबको लोग अपने घर बुलाकर थे पूजा करने के लिए पर इस ब्राह्मण को कोई नहीं बुलाता था
घर में खाने के लिए अन्य नहीं है घरवाली ताने मारती है बच्चे रोते हैं
पर इसके पास कुछ है ही नहीं , परेशान है कि मुझे कोई पूजा करने के लिए दान दक्षिणा देने के लिए कोई बुलाता ही नहीं है
पूजा होंगी तो दान दक्षिणा होंगी ना दूसरों को लोग बुला लेते हैं पर मुझे नहीं बुलाते
एक बात याद रखना प्रेमियों जब कोई कथा सुनते हैं ना तो उसके हर पहलू में एक एक मोड़ पर शिक्षा होती है बस लेने वाला चाहिए
संत महापुरुष वचन करते हैं कि शिक्षा लेने वाला तो पेड़ पौधों से भी शिक्षा ले लेता है जड़ वस्तुओं से भी शिक्षा ले लेता है
हम तो आज महापुरुषों से भी शिक्षा लेने को तैयार नहीं है
जहां से भी शिक्षा मिले अपने से छोटे से मिले अपने से बड़े से मिले किसी मूर्ख से मिले शिक्षा जहा से मिले ले लो
ज्ञान जहां से मिले ले लो, अभी यहां पर क्या ज्ञान है
कई लोग कहते हैं कई लोग देखते हैं दुकानें सबकी एक जैसी है
एक ही मार्केट में है किसी की बहुत चलती है किसी की बिलकुल नहीं चलती सोचते हैं ना कि हमारी क्यों नहीं चलती इसका जवाब है इसमें उसकी क्यों चलती है इसका भी जवाब है इसमें
कोई कहे कि मैं अपने दिमाग से दुकान चलाता हूं अपनी मेहनत से दुकान चलाता हूं
महापुरष कहते है नही..
मेहनत तो रोड पर जो मजदूर करता है जो पत्थर तोड़ता है इतनी मेहनत तो कोई कर ही नहीं सकता
Bol Jai Kara Bol Mere Shri Guru Maharaj Ki Jai