Katha 58 | Sawan Ke Mahine Me Roj Sune | Shri Guru Maharaj Ji Ki Katha | SSDN | 27 July |
Katha 58
27 July 2024
Sawaan Ke Mahine Ki Shri Guru Maharaj Ji Ki Katha
गुरुमुखों हम सब जन कितने खुशनसीब हैं
जो कि महापुरुषों की असीम कृपा से हमें यह पावन घड़ियां नसीब हुई महापुरुषों के चरणों में बैठक मिल जाना उनकी
पावन संगति प्राप्त हो जाना यह जीव के पुण्य कर्मों का फल है क्योंकि महापुरुषों के चरणों में आने से ही जीव का जो मन है वह भक्ति से जुड़ता है
नाम से जुड़ता है भक्ति और नाम से जोड़ने के लिए ही महापुरुष दिन रात प्रयत्नशील रहते हैं
कि सेवकों का जो मन है वह हर समय सतगुरु के चरणों से जुड़ा रहे तो यह भेद संसार के अंदर और कोई भी नहीं बतला सकता केवल केवल संत महापुरुष ही है जो कि जीव को संसार में सुखी रहने का सच्चा राज समझाते हैं
जैसे कहा भी है कि सुखी होने का गहरा राज है यह समझाते ..
कितना सुख भरा है महापुरुषों के वचनों में
फरमाते भी है कि संसार में केवल केवल संत महापुरुष ही हैं जो कि जीव को संसार में सुखी रहने का राज बतलाते हैं कि किस वस्तु में सुख है
और किस वस्तु में दुख है
तो जो जीव सतगुरु के वचनों का अनुसरण करते हैं
उनसे नाम उपदेश लेकर के नाम की कमाई करने में लग जाते हैं वही गुरुमुख अपने जीवन के
अंदर सच्चा सुख प्राप्त करते हैं तो
महापुरुष हमें संसार में जीने का ढंग समझाते हैं कि संसार में किस प्रकार अपने जीवन को व्यतीत करना है
तो जो जीव महापुरुषों की चरण शरण में आकर के नाम और भक्ति की दात को प्राप्त करके नाम का स्मरण करते हैं
नाम की कमाई करते हैं स्वास शवास के अंदर
सिमरण करके अपने जीवन को सफल बनाते हैं वह अपना यह लोक तो सवार ही लेते हैं उनका परलोक भी सवर जाता है
तो महापुरुष हमें हर समय नाम से जोड़ना चाहते हैं कि अगर नाम से जुड़े रहोगे तो कभी भी आपके जीवन के अंदर दुख आएगा ही नहीं
ऐसे ही एक बार हमारे श्री श्री 108 श्री पंचम पादशाही महाराज जी के चरण कमलों में कोई गुरुमुख परिवार आया विनय करने लगा कि स्वामी जी जीवन के अंदर दुख बहुत आते हैं
जीवन के अंदर तकलीफें बहुत है
दुख बहुत है
आशीर्वाद दो हमारे दुख जो हैं वह खत्म हो जाए
तो श्री गुरु महाराज जी मौज में आए
अपने वचनों में फरमाने लगे कि प्रेमी भजन
सिमरण करते हो ?
विनय करते हैं कि जी स्वामी जी भजन सिमरन तो करते हैं
तो श्री गुरु महाराज जी ने फरमाया कि दुख में करते हो या सुख में करते हो
तो विनय करते हैं कि स्वामी जी हम तो दुख में करते हैं
तो श्री गुरु महाराज जी ने फरमाया कि सुख में भजन किया करो हमारा आशीर्वाद है कि कभी दुख आपके नजदीक भी नहीं आएगा
तो महापुरुष तो एक बात पर ही जोर देते हैं
जैसा कि नित्य प्रति हमारे श्री हजूर सदगुरु दाता दीनदयाल महाराज जी भी अपने सेवकों को अपने पावन वचनों के अंदर
फरमाते हैं
जो भी आता है विनय करता है
श्री गुरु महाराज यही फरमाते हैं कि दो घंटे भजन स्मरण करो दो घंटे भजन सिमरण करो..
क्योंकि सब दुखों की जो औषध है वह केवल केवल सतगुरु का नाम है और नाम का स्मरण करने से ही इंसान सभी दुखों से बचा रहता है तो हम भी श्री सदगुरु देव महाराज जी के चरण कमलों में यही विनय करते हैं कि प्रभु
हमें भी शक्ति दो हम भी पलपल स्वास स्वास सदा नाम का स्मरण करते रहे..
बेशक हम संसार में रहे दुनिया के सब कार्ज करें लेकिन
अपने असली फर्ज को ना भूले जिस लक्ष्य को लेकर के हम दुनिया में आए हैं अगर अपने लक्ष्य को समझ लेंगे और सतगुरु के वचनों की पालना करेंगे स्वास शवास के अंदर स्मरण करेंगे तो श्री गुरु महाराज जी हमारे इस
लोक के भी जिम्मेवार हैं और हमारे परलोक
के भी जिम्मेवार हैं
तो हमारा यही फर्ज है कि जो श्री गुरु महाराज जी ने कृपा करके हमारे लिए गुरु भक्ति के नियम बनाए हैं और जो दो घंटे भजन व्यास का नियम बनाया है उन नियमों को निभाते हुए अपने समय को भी सफल करें और श्री सदगुरु देव
महाराज जी की कृपा के पात्र बने
बोलो जय कारा बोल मेरे श्री गुरु महाराज की जय