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पचरा प्रेम गीत टप्पा (TAPPA PREM GEET) NARENDRA SINGH SIDHI

BHARAT LOK DARSHAN 82,027 7 years ago
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#टप्पा_प्रेम_गीत - काशी जी हम जवा बोबाई सजन के लाने जमुना जी मा जीर.. जमुना जी मा जीर सुना हो... तोरे करन मै वन-वन भटकूँ धरय न मनबा धीर....... मूड़े गठरिया हाथे म झोरा । कहा जाती रहनिया चुनू क ब्यारा ।। कच्चा करउदा करू लागे । मोर लइले गठरिया गरू लागे ।। बरखा न पानी झुखाय गई धान । चला उड़चली चिरई कोइलिया खदान ।। गोहू कै रोटी ऊपर चटनी । छैला तोही घुमइहौ शहर कटनी ।। गोहू कै रोटी गोजहरा कै । मन लइगे बिटीबा उचहरा कै ।। डोभरी के लासी गली मा चुचुआय | तोर घर के बिआही गली मा लुलुआय || कत्था के खाये सुपारी बिसरै । तइसय उढरी के आये बियाही बिसरै ।। यारी लगउबे दुइन दिन का | बदनामी ता होई सबय दिन का || आमा के लंउची झूले मा टूटय | मोर तोसे पिरितिया कबो न छूटय || पाटी ता पारे बनाए चेहरा | घर रोबय बिआही मनुष मेहरा || आमा के पत्ता बनाउ चोंगी | तोरे खातिर रजनिया भएऊँ जोगी || आमा के पेड़े पटक तरुआ | मोरे माथे तय रहबे जनम रंडुआ || आमा लगउबय अमिलपुर मा | तोसे सादी करइहौं जबलपुर मा || आसों के धान मा चाउर नहीं आय | हम तै कहां-कहां बगबै ठउर नही आय || फोर फोर पथरा लगाऊ चट्टा । चोरी चोरी पठाय दे बीड़ी क कट्टा ।। नदिया कछारे परी है सूती | आजु डाला भरी न तोरे बूते || तामे के पइसा बूढ़ीबन का | अंगरेजी रूपइया बिटीबन का || अमली के पेड़े फटक तरुआ | तोही अइसै बदा है जनम रंडुआ || पान खाय ले मुन्नी बैर नहीं आय | तनी बोलि बताय ले बैर नही आय || खाते सेमइया बतउते भाजी । तोरे जियरा म छैला दगाबाजी ।। तोर मोर यारी दऊ जाने । जइसे टमसा म सतना हिलोर मारे ।। गयव तै बजरिया लयायव हरदी । नये घइला क पानी करय सरदी ।। नबा नबा बंधा नबा है ठेकेदार । पइसा मारे हरामी न दीन्हिस हमार ।। लम्मी सड़किया म गोला बाजार । मोही लइ दे मुदरिया छिगुरिया के तार ।। बरखा है पानी समिट गे हि धूर । मन माया फसाय के चली जइहे दूर ।। सइकल से आना सइकल से जाना । दगाबाजी न कीन्हे गली म थाना ।। सम्पति भोग्यव बिपत भोगिहो । तोरे जियरा के लाने जहल भोगिहो || पानी तो बरखे पहरियन मा । बूदा लइगे मछरिया दहरियन मा ।। पानी तो बरखे चुअय ओरिया । परदेशी न भीजय ओढाऊ फरिया खाय भाजी भई राजी । दुनिया म बगर गे दगा बाजी ।। हम नहि गाई काहू क जोर के । कउनो रनिया न गावै हमू क जोर के ।। छूला के फूले ललामी देखाय । मउहरिया म गोरी खड़े बिदुराय ।। गाड़ी तो भागे पटरियन मा । मोही छैला बोलावै नजरियन मा ।। गाडी तो अबय गोलाई दइके । मोही छैला बोलावै मिठाई लइके ।। अम्मा के खाले बिछी खटिया। सुख सोबय कुमारी जुरे रशिया ।। गयव तै बजरिया बेसाह लायव छीट । बदलामी जो गइहे उकेल ल्याहो पीठ ।। कत्था के खाये सुपारी बिसरै । तइसय उढरी के आये बियाही बिसरै ।। खाय खाय भाजी भई राजी । दुनिया म बगर गे दगाबाजी ।। पथरा के फोरे सकल नहि आय । आठ बजगे पै छैला उचत नहि आय ।। लट्ठा कै धोती किनारी नहि होय । बिना बोले बताने चिन्हारी नहि होय ।। खोदी खदानिया म चारा नहि आय । बिना लबरी बताने गुजारा नहि आय ।। फूल ता फूलय अकासन मा | तोंहका अइसय लोभउबय बतासन मा || गोरी हम नही तरसन संगतिया का | रानी एक हम तरसी बतीसियन का || कंधबा के बोरी भूईं मा धय दे | हमका लइ ले कंधइया हलुक अउबय || मक्का के रोटी उपर चटनी | गोरी तोंहका घुमउबय शहर कटनी || गयेन बजारे बेसाहन मर्चा | मोर चर्चा जो चलबे उकेलब चरसा || लट्ठा कै धोती किनारी नहि होय । बिना बोले बताने चिन्हारी नहि होय ।। नरेंद्र सिंह, सीधी

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