#टप्पा_प्रेम_गीत -
काशी जी हम जवा बोबाई सजन के लाने
जमुना जी मा जीर..
जमुना जी मा जीर सुना हो...
तोरे करन मै वन-वन भटकूँ
धरय न मनबा धीर.......
मूड़े गठरिया हाथे म झोरा ।
कहा जाती रहनिया चुनू क ब्यारा ।।
कच्चा करउदा करू लागे ।
मोर लइले गठरिया गरू लागे ।।
बरखा न पानी झुखाय गई धान ।
चला उड़चली चिरई कोइलिया खदान ।।
गोहू कै रोटी ऊपर चटनी ।
छैला तोही घुमइहौ शहर कटनी ।।
गोहू कै रोटी गोजहरा कै ।
मन लइगे बिटीबा उचहरा कै ।।
डोभरी के लासी गली मा चुचुआय |
तोर घर के बिआही गली मा लुलुआय ||
कत्था के खाये सुपारी बिसरै ।
तइसय उढरी के आये बियाही बिसरै ।।
यारी लगउबे दुइन दिन का |
बदनामी ता होई सबय दिन का ||
आमा के लंउची झूले मा टूटय |
मोर तोसे पिरितिया कबो न छूटय ||
पाटी ता पारे बनाए चेहरा |
घर रोबय बिआही मनुष मेहरा ||
आमा के पत्ता बनाउ चोंगी |
तोरे खातिर रजनिया भएऊँ जोगी ||
आमा के पेड़े पटक तरुआ |
मोरे माथे तय रहबे जनम रंडुआ ||
आमा लगउबय अमिलपुर मा |
तोसे सादी करइहौं जबलपुर मा ||
आसों के धान मा चाउर नहीं आय |
हम तै कहां-कहां बगबै ठउर नही आय ||
फोर फोर पथरा लगाऊ चट्टा ।
चोरी चोरी पठाय दे बीड़ी क कट्टा ।।
नदिया कछारे परी है सूती |
आजु डाला भरी न तोरे बूते ||
तामे के पइसा बूढ़ीबन का |
अंगरेजी रूपइया बिटीबन का ||
अमली के पेड़े फटक तरुआ |
तोही अइसै बदा है जनम रंडुआ ||
पान खाय ले मुन्नी बैर नहीं आय |
तनी बोलि बताय ले बैर नही आय ||
खाते सेमइया बतउते भाजी ।
तोरे जियरा म छैला दगाबाजी ।।
तोर मोर यारी दऊ जाने ।
जइसे टमसा म सतना हिलोर मारे ।।
गयव तै बजरिया लयायव हरदी ।
नये घइला क पानी करय सरदी ।।
नबा नबा बंधा नबा है ठेकेदार ।
पइसा मारे हरामी न दीन्हिस हमार ।।
लम्मी सड़किया म गोला बाजार ।
मोही लइ दे मुदरिया छिगुरिया के तार ।।
बरखा है पानी समिट गे हि धूर ।
मन माया फसाय के चली जइहे दूर ।।
सइकल से आना सइकल से जाना ।
दगाबाजी न कीन्हे गली म थाना ।।
सम्पति भोग्यव बिपत भोगिहो ।
तोरे जियरा के लाने जहल भोगिहो ||
पानी तो बरखे पहरियन मा ।
बूदा लइगे मछरिया दहरियन मा ।।
पानी तो बरखे चुअय ओरिया ।
परदेशी न भीजय ओढाऊ फरिया
खाय भाजी भई राजी ।
दुनिया म बगर गे दगा बाजी ।।
हम नहि गाई काहू क जोर के ।
कउनो रनिया न गावै हमू क जोर के ।।
छूला के फूले ललामी देखाय ।
मउहरिया म गोरी खड़े बिदुराय ।।
गाड़ी तो भागे पटरियन मा ।
मोही छैला बोलावै नजरियन मा ।।
गाडी तो अबय गोलाई दइके ।
मोही छैला बोलावै मिठाई लइके ।।
अम्मा के खाले बिछी खटिया।
सुख सोबय कुमारी जुरे रशिया ।।
गयव तै बजरिया बेसाह लायव छीट ।
बदलामी जो गइहे उकेल ल्याहो पीठ ।।
कत्था के खाये सुपारी बिसरै ।
तइसय उढरी के आये बियाही बिसरै ।।
खाय खाय भाजी भई राजी ।
दुनिया म बगर गे दगाबाजी ।।
पथरा के फोरे सकल नहि आय ।
आठ बजगे पै छैला उचत नहि आय ।।
लट्ठा कै धोती किनारी नहि होय ।
बिना बोले बताने चिन्हारी नहि होय ।।
खोदी खदानिया म चारा नहि आय ।
बिना लबरी बताने गुजारा नहि आय ।।
फूल ता फूलय अकासन मा |
तोंहका अइसय लोभउबय बतासन मा ||
गोरी हम नही तरसन संगतिया का |
रानी एक हम तरसी बतीसियन का ||
कंधबा के बोरी भूईं मा धय दे |
हमका लइ ले कंधइया हलुक अउबय ||
मक्का के रोटी उपर चटनी |
गोरी तोंहका घुमउबय शहर कटनी ||
गयेन बजारे बेसाहन मर्चा |
मोर चर्चा जो चलबे उकेलब चरसा ||
लट्ठा कै धोती किनारी नहि होय ।
बिना बोले बताने चिन्हारी नहि होय ।।
नरेंद्र सिंह, सीधी