निफ़्टी50 ने गिरावट का 28 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हालत ये है कि 1996 की तरह मंदी की आहट की बात होने लगी है। 2025 में लोग 2008 को याद करने लगे हैं। मिडिल क्लास की उम्मीदों के आख़री ठिकाने बने स्टॉक मार्केट से पांच महीने से हाहाकार ही सुनाई दे रहा है। ट्विटर पर सेन्सेक्स की लाली छाई है और बाज़ार के आठ लाख करोड़ स्वाहा हो चुके हैं। जिस हालत में भारत का बाज़ार है, लोग सवाल करने लगे हैं कि हम मंदी की तरफ़ बढ़ रहे हैं या मंदी आ चुकी है?
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