आदमी जिंदगी में बस लापरवाही से जीता चला जाता है
न भविष्य की कुछ चिंता है
ना कुछ बड़ा करने की कामना।
बस वर्तमान में छोटी छोटी चीजों में मजा ढूंढता है,
और बहुत गलतियां करता चला जाता है।
कई बार आदमी निरर्थक भय के कारण
तो कई बार आत्महीनता के कारण
कई बार लापरवाही के कारण तो कई बार अज्ञान के कारण आदमी गलती करता ही है।
और इसका बड़ा कारण यह भी है कि आदमी सीखना नहीं चाहता
जिसने सीखने पर ध्यान दिया जिंदगी में बहुत ऊंचाई पर गए।
जीवन में यदि हम लापरवाही से आगे बढ़ते हैं तो बहुत सारी गलतियां होती है, और जब हमारी किसी गलती का दुष्परिणाम होता है, तो हमें ग्लानि या पछतावा भी हो सकता है।
इस तरह ही भावनाएं सामान्य हैं और हर मनुष्य के अंदर आती हैं।
लेकिन कई बार हम इस भावना से निकल नहीं पाते और यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
ग्लानि एक नकारात्मक भाव है और यह मुख्यतः अतीत की किसी घटना से जुड़ा है। ग्लानि आपको अतीत में जीने पर मजबूर करती है, जो आपके वर्तमान और भविष्य दोनों को प्रभावित करता है।
उदाहरण के तौर पर, हो सकता है आपने किसी प्रेजेंटेशन पर मेहनत नहीं की और आप ऑफिस में एक बड़ी पदोन्नति से चूक गयीं।
इस बात का मलाल आपको रहेगा कि आपने तब मेहनत क्यों नहीं की। हालांकि इस स्थिति से सीख लेने की जरूरत है, लेकिन अतीत के बारे में सोचकर आप वर्तमान में भी पूरी मेहनत नहीं कर रही हैं। और इसका प्रभाव आपके भविष्य पर पड़ेगा।
पछतावा होने पर भी आप गुजरे हुए कल को बदल नहीं सकते। इसलिए उस भावना से बाहर निकलना ही बेहतर होता है।
एक स्टडी के अनुसार ग्लानि की भावना से ग्रस्त व्यक्ति में अवसाद होने की संभावना बढ़ जाती है। यही नहीं, नियमित ग्लानि महसूस करने से व्यक्ति दो दशक के भीतर ही डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी गम्भीर मानसिक समस्याओं का शिकार हो सकता है।
ग्लानि से बाहर निकलने के लिए क्या करें-
सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि जिस स्थिति को लेकर परेशान है वह गुजर चुकी है और उसे बदला नहीं जा सकता। अतीत मे रहना आप से भविष्य को सुधारने का अवसर भी छीन लेता है। इसलिए जो बीत गया उसे जानें दें।
1 जो विचार आपको परेशान कर रहे हैं उन्हें बाहर निकालें
किसी भी बात को अपने अंदर रख कर आप नकारात्मकता को बढ़ाती हैं। इसे अपने सिस्टम से बाहर जाने दें। किसी दोस्त या साथी से अपने मन की बात कहें या उसे लिख लें। इससे आप इस विचार से मुक्त हो पाएंगी और उससे जुड़ी भावनाएं भी धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी।
2 अतीत से सीख लें और भविष्य को बेहतर बनाएं
आप से जो गलती हो गयी उसको सीख के तौर पर देखें। और सुनिश्चित करें कि आप भविष्य बेहतर हो।
3 दूसरों के अनुसार नहीं, अपनी खुशी के लिए जियें
हम अक्सर कई कदम दूसरों के अनुसार लेते हैं, जो आजीवन एक रिग्रेट बन कर रह जाता है। अपने जीवन के निर्णय खुद लें, ताकि उसके परिणाम को आप साफ मन से अपना सकें। अगर दूसरों के कहे अनुसार चलेंगी तो जीवन भर ग्लानि में रहेंगी और जीवन का आनंद नहीं ले पाएंगी।
4 मेडिटेशन जैसी अच्छी आदतों को अपनाएं
मेडिटेशन यानी ध्यान मानसिक स्वास्थ्य के लिये सबसे अच्छा है। यह आपके मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार करता है और नकारात्मक विचारों को बाहर करता है। ये आपको खुद को एक्सेप्ट करना भी सिखाता है जो सुखद जीवन के लिए आवश्यक है।
जीवन में यदि हम सावधानी से आगे बढ़ते चले जाएंगे और दूसरों के तजुर्बे से शिक्षा लेंगे तो हम इस प्रकार के पछतावे से बच सकते हैं
आनंद स्वामी
महंत श्री कृष्ण मंदिर गीता धाम
@AnandDhara